श्री पण्डोखर सरकार धाम

आध्यात्मिक साधकों के लिए एक दिव्य गंतव्य।

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धाम का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गौरव

श्री पण्डोखर सरकार धाम, भारत की पावन भूमि पर स्थित एक ऐसा दिव्य स्थल है जहाँ इतिहास, धर्म और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इसकी कथा युगों से चलती आ रही है — त्रेतायुग, द्वापरयुग और अब कलियुग तक। आइए जानें इसकी ऐतिहासिक यात्रा:

🌞 त्रेतायुग का आरंभ: राजा मरुत और यज्ञ की भूमि

सूर्यवंशी राजा मरुत ने संतान प्राप्ति की कामना से पुष्पावती नदी के तट पर एक महान यज्ञ का आयोजन किया। यह स्थान इतना पुण्यशील था कि यहीं भगवान सूर्य ऋषि के तपोबल से शिवबालाजी प्रकट हुए और अपना दिव्य आश्रम स्थापित किया। कहा जाता है कि राजा मरुत ने स्वयं इस आश्रम की स्थापना की थी।

⚔️ द्वापरयुग: पांडवों का आगमन और श्रीकृष्ण के दर्शन

महाभारत काल में, अज्ञातवास के दौरान पाँचों पांडवों और माता द्रौपदी ने इस भूमि पर पाँच दिन तक विश्राम किया था। यह वही भूमि है जहाँ धर्मराज युधिष्ठिर को भगवान श्रीकृष्ण ने साक्षात दर्शन दिए थे। इस स्थल की दिव्यता यहीं से और प्रखर हो उठी।

🙏 तीर्थ की स्थापना: हनुमान जी और पांडेश्वर महादेव

कालांतर में पाँचों पांडवों ने यहाँ भगवान श्री हनुमान जी (पण्डोखर सरकार) तथा सदाशिव पांडेश्वर महादेव की दिव्य मूर्तियों की स्थापना की। इसके पश्चात यह भूमि एक चमत्कारी तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गई, जहाँ भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होने लगीं।

🗱️ कलियुग में पुनः जागृति: गुरुशरण शर्मा जी महाराज का योगदान

कलियुग में जब यह धाम जनसामान्य की स्मृति से ओझल होने लगा, तब पंडित गुरुशरण शर्मा जी महाराज ने अपने तपोबल, योगसाधना और पराविज्ञान के माध्यम से इस धाम की पुनः प्रतिष्ठा की। उन्होंने देश-विदेश में सत्संग, दिव्य दरबार और पराविज्ञान शिविरों के द्वारा श्री पण्डोखर सरकार की महिमा को पुनः जन-जन तक पहुँचाया।

🌍 आज का श्री पण्डोखर धाम: भक्ति और दिव्यता का केंद्र

आज यह धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और दिव्यता का प्रतीक बन चुका है। यहाँ 365 दिन, दिन-रात भक्तजन अपनी मनोकामनाएँ लेकर आते हैं।

  • जीवन की उलझनों का समाधान पर्ची द्वारा पाते हैं।
  • गुरुदेव की दिव्य दृष्टि एवं आशीर्वाद से नया जीवन अनुभव करते हैं।
  • और अनुभव करते हैं आत्मिक शांति व चमत्कारी ऊर्जा का संचार।

🌺 निष्कर्ष:

श्री पण्डोखर धाम केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभूति है — एक ऐसा केंद्र जहाँ युगों का इतिहास, आस्था की शक्ति और गुरुओं की कृपा एकत्रित होकर भक्तों के जीवन को दिशा देती है।

!! समस्त श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सूचना !!

श्री पण्डोखर सरकार धाम में आपका स्वागत है।

आप यहाँ त्रिकालदर्शी गुरुदेव से अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए श्रद्धापूर्वक आए हैं। इस दिव्य अनुभव की पवित्रता और शक्ति को बनाए रखने के लिए, आपसे विनम्र निवेदन है कि इस अनिवार्य नियम का पालन करें:

अपनी समस्या या प्रश्न किसी को भी न बताएं।

कृपया पूज्य गुरुदेव जी से मिलने से पहले, अपने आने का कारण किसी भी कर्मचारी, सेवादार या अन्य श्रद्धालु को न बताएं।

गुरुदेव त्रिकालदर्शी हैं और वे आपके मन के प्रश्नों को स्वयं ही पर्चे पर लिख देते हैं। इस चमत्कार को सम्पूर्ण रूप से अनुभव करने और प्रामाणिक समाधान पाने के लिए आपका मौन रहना अत्यंत आवश्यक है।

अपनी अर्ज़ी अपने हृदय में रखें और पूर्ण श्रद्धा के साथ सीधे गुरुदेव के समक्ष प्रस्तुत करें।

आज्ञा से,
श्री गुरुशरण जी महाराज, पीठाधीश्वर, श्री पण्डोखर सरकार धाम

अमावस्या पर्व: साधना का एक दिव्य अवसर

श्री पण्डोखर सरकार धाम में, अमावस्या पर्व केवल एक दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन नहीं है - यह अमावस्या से लेकर पूर्णिमा तक चलने वाला एक पवित्र और दिव्य अवसर है। माना जाता है कि यह अवधि अपार आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्य कृपा से भरी होती है।

🕉 पहली बार आने वाले भक्तों के लिए

धाम में पहली बार आने वाले भक्तों को धाम के पीठाधीश्वर श्री गुरुशरण जी महाराज के समक्ष चुपचाप अपनी अर्ज़ी (प्रार्थना या अनुरोध) रखने का दुर्लभ अवसर प्राप्त होता है।

  • ✅ भक्तों को अपनी समस्या या प्रश्न किसी को भी नहीं बताना चाहिए।
  • 🙏 अपनी यात्रा को पूरा करने के लिए, पहले निर्धारित पूजा विधि (विधान) का पालन करें।
  • 📜 गुरुदेव, अपनी दिव्य दृष्टि से, एक पर्चा प्रदान करते हैं - एक पवित्र पर्ची जो आपके अनकहे प्रश्न और उसका आध्यात्मिक समाधान प्रकट करती है।
  • 🌌 यह केवल परंपरा नहीं है - यह साक्षात दिव्य दर्शन है, जिसका अनुभव केवल वे ही करते हैं जो पूर्ण विश्वास और समर्पण के साथ आते हैं।

🔁 दूसरी बार आने वाले भक्तों के लिए

जिन भक्तों ने अपना पर्चा पहले ही प्राप्त कर लिया है, उन्हें अमावस्या से पूर्णिमा के बीच वापस आना होगा ताकि वे:

  • 🕯️ भक्ति के साथ पूजा, पाठ और मंत्र जप करें (पूजा विधि के अनुसार)।
  • 🔗 पवित्र श्री पित्रशिला पर अपना रक्षा सूत्र बांधें।
  • ✍️ और फिर अपने अमावस्या पर्ची पर श्री गुरुदेव महाराज के हस्ताक्षर करवाकर अनुष्ठान पूरा करें।

🛑 महत्वपूर्ण: आपकी अमावस्या यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक कि यह आध्यात्मिक प्रक्रिया पूरी न हो जाए। साधना के बिना, धाम की पवित्र परंपराओं के अनुसार आपकी भागीदारी अधूरी रहती है।

🛕 अनुष्ठान की पूर्णता हेतु दिशानिर्देश

यह सुनिश्चित करने के लिए कि अमावस्या पर्व के दौरान आपकी यात्रा आध्यात्मिक रूप से मान्य और पूर्ण हो:

  • 📅 अमावस्या और पूर्णिमा के बीच की अवधि के दौरान ही धाम आएं।
  • 🔔 आध्यात्मिक क्रियाओं में संलग्न हों जैसे:
  • मंत्र जाप
  • सेवा
  • ध्यान, प्रसाद और प्रार्थना
  • 🪢 श्री पित्रशिला पर अपना रक्षा सूत्र बांधें।
  • 🙏 निर्धारित विधियों में भाग लें।

🌟 केवल वे जो अनुशासन, भक्ति और समर्पण के इस मार्ग का पालन करते हैं, वे ही अपनी अर्ज़ी के चमत्कार, शांति और पूर्ति का अनुभव करते हैं।

अमावस्या पर्व तिथियाँ

पिछला पर्व

Amavasya15 जून 2026
Poornima29 जून 2026

आगामी/वर्तमान पर्व

Amavasya14 जुल॰ 2026
Poornima29 जुल॰ 2026

अगला पर्व

Amavasya12 अग॰ 2026
Poornima28 अग॰ 2026

अधिक जानकारी के लिए कृपया धाम के आधिकारिक माध्यमों से तिथियों की पुष्टि करें।

पूजा विधि (विधान)

1. पुष्पवती नदी में स्नान और दीपदान

  • सबसे पहले पुष्पवती नदी में पवित्र स्नान करें।
  • सुनिश्चित करें कि पानी की गहराई और प्रवाह सुरक्षित है। यदि आप सहज महसूस करते हैं तभी स्नान करें।
  • फिर दीपदान करें (जलता हुआ दीपक नदी में अर्पित करें)।
  • एक नारियल लें, उसे अपने सिर के ऊपर से सात बार घड़ी की दिशा में घुमाएँ:
  • पुरुष: नारियल को तोड़कर टुकड़ों में प्रवाहित करें।
  • महिलाएं: पूरे नारियल को सीधे प्रवाहित करें।
  • पुष्पवती नदी का जल एक बोतल में भर लें (आगे के पूजन कार्यों हेतु)।
  • इस प्रक्रिया के दौरान अपने निजी सामान का ध्यान रखें।

2. नीम वृक्ष की परिक्रमा

3. श्री हनुमानजी पण्डोखर सरकार के दर्शन

4. अभिषेक प्रक्रिया

  • संग्रहित पुष्पवती जल से निम्नलिखित देवों का अभिषेक करें:
  • श्री सूर्य बालाजी
  • शिव बालाजी

5. मंत्र जाप एवं साधना

6. रक्षा सूत्र अर्पण (दूसरी बार आने वाले भक्तों के लिए)

  • यदि आप दूसरी बार दर्शन करने आए हैं, तो अपने रक्षा सूत्र को खोलें और श्री पित्रशिला पर अर्पण करें।

7. समापन दर्शन

8. दैनिक नियम (घर पर पालन करें)

  • भक्ति को निरंतर बनाए रखने के लिए, प्रतिदिन घर पर यह साधना अवश्य करें:
  • 1 माला “ॐ नमः शिवाय” का जप
  • 1 माला गुरु मंत्र का जप
  • 1 बार पण्डोखर सरकार चालीसा का पाठ

मंदिर खुलने का समय

प्रातःकाल

सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक

दोपहर से रात्रि

दोपहर 2:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक

आरती एवं महाप्रसाद

प्रातः आरती: सुबह 8:00 बजे

महाप्रसाद: 11:00 बजे

सायं आरती: शाम 7:00 बजे

महाप्रसाद: 7:30 बजे